जांच में सामने आया है कि इस कैंपेन के तहत चीन ने AI से जनरेटेड फर्जी तस्वीरें तैयार कराईं, जिनमें भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ाई जैसे हालात दिखाए गए थे। इन तस्वीरों को इस तरह वायरल किया गया कि राफेल की डील के आसपास अस्थिरता और डर का माहौल पैदा हो सके।
रिपोर्ट का कहना है कि इन नकली विजुअल्स का मकसद वैश्विक दर्शकों को भ्रमित करना और राफेल की खरीद में देरी या रुकावट पैदा करना था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की डिजिटल भ्रामक रणनीतियाँ
Author: JAN TV Editorial Team
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