डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि या तो वे “नई हकीकत” को स्वीकार करें या फिर अस्तित्व के संकट के लिए तैयार रहें। अमेरिका के साथ-साथ कुछ अन्य पश्चिमी देशों द्वारा भी फंडिंग घटाए जाने से यूएन की कई मानवीय योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। पहले से ही संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को बजट में कटौती और कर्मचारियों की छंटनी जैसे कदम उठाने पड़े हैं।
इस फैसले की आलोचना करने वालों का कहना है कि फंडिंग में कमी से भुखमरी, विस्थापन और बीमारियों से जूझ रहे लाखों लोगों पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही, इससे वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सॉफ्ट पावर को भी नुकसान पहुंच सकता है। चूंकि संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग में सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का ही रहा है, ऐसे में इस कटौती का प्रभाव यूएन के मानवीय और राहत कार्यों पर लंबे समय तक दिख सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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