विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप के पीछे हटने की सबसे बड़ी वजह युद्ध के लंबे और महंगे होने का खतरा था। होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना अमेरिका के लिए सैन्य और आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता था। इसके अलावा तेल कीमतों में उछाल और खाड़ी देशों की चिंता ने भी अमेरिका पर दबाव बढ़ाया। चीन और पाकिस्तान की मध्यस्थता ने भी इस संघर्षविराम को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे कूटनीतिक संतुलन बदलता नजर आया।
आगे की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर सहमति फिलहाल राहत जरूर देती है, लेकिन इस्राइल जैसे देश पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। आने वाले दो हफ्ते तय करेंगे कि यह संघर्षविराम स्थायी शांति में बदलेगा या फिर एक बड़े टकराव की तैयारी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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