अमेरिका में टैरिफ रिफंड शुरू, भारतीय निर्यातकों के लिए अहम मौका
(India) अमेरिका ने 20 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर पैदा हुआ है। Global Trade Research Initiative (GTRI) ने कहा है कि भारतीय कंपनियों को इस रिफंड का लाभ पाने के लिए अपने अमेरिकी खरीदारों से सक्रिय रूप से संपर्क करना होगा।

GTRI के अनुसार, रिफंड की राशि केवल अमेरिकी आयातकों को मिलेगी, इसलिए भारतीय निर्यातकों के पास इस पर सीधे दावा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसे में उन्हें अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ बातचीत कर हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी होगी।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2 अप्रैल 2025 से लागू अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यात को बड़ा झटका दिया था। कुल रिफंड राशि करीब 166 अरब डॉलर आंकी गई है, जिसमें लगभग 12 अरब डॉलर भारत से आयातित वस्तुओं से जुड़ा है।

रिफंड प्राप्त करने के लिए अमेरिकी आयातकों को शिपमेंट डेटा, टैरिफ विवरण और भुगतान के प्रमाण के साथ ऑनलाइन दावा दाखिल करना होगा।

यह टैरिफ व्यवस्था शुरुआत में 10 प्रतिशत से लागू हुई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर भारत के लिए 50 प्रतिशत तक कर दिया गया था। हालांकि, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये टैरिफ अवैध घोषित कर दिए गए, जिससे अब रिफंड की प्रक्रिया शुरू हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अमेरिका को होने वाले लगभग 53 प्रतिशत निर्यात—खासतौर पर टेक्सटाइल और परिधान सेक्टर—इन टैरिफ से प्रभावित हुए थे और रिफंड में इनका बड़ा हिस्सा शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय निर्यातकों के लिए नुकसान की भरपाई करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, बशर्ते वे समय रहते अपने अमेरिकी पार्टनर्स के साथ समन्वय स्थापित करें।

Author: JAN TV Editorial Team

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