पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, जहाजरानी, बुनियादी ढांचा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने छह बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूत करने, सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास, तकनीक साझा करने और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर विशेष जोर दिया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता हुआ है। इसके तहत भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की हिस्सेदारी बढ़कर 3 करोड़ बैरल हो जाएगी। साथ ही भारत में रणनीतिक गैस भंडार स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर इंडियन ऑयल और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच भी समझौता हुआ है, जिससे भारत में रसोई गैस की आपूर्ति को और मजबूत किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, निवेश योजना के तहत अबू धाबी निवेश प्राधिकरण और भारत के राष्ट्रीय अवसंरचना एवं निवेश कोष भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाशेंगे। इसके अलावा यूएई की बड़ी कंपनियां भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में भी अरबों डॉलर का निवेश करेंगी।
दोनों देशों ने गुजरात के वडीनार में जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने, बंदरगाह और तटीय ढांचे को मजबूत करने तथा भारत की एआई क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए सुपरकंप्यूटर क्लस्टर स्थापित करने पर भी सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इन समझौतों को भारत-यूएई संबंधों के लिए “अहम” बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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