(DELHI, DELHI)
दिल्ली पुलिस ने अंतर-राज्यीय नवजात और बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक बड़े ऑपरेशन में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बचाया गया, जबकि जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले दो वर्षों में करीब 30 नवजात शिशुओं की तस्करी कर चुका है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अलग-अलग राज्यों के गरीब परिवारों को निशाना बनाकर नवजात बच्चों की गैर-कानूनी खरीद-फरोख्त करता था। मामले की जांच में गिरोह के नेटवर्क, काम करने के तरीके और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत एक सतर्क नागरिक से मिली सूचना के आधार पर हुई। सूचना देने वाले व्यक्ति ने पहाड़गंज इलाके में एक महिला को हर बार अलग-अलग नवजात बच्चों के साथ देखा था, जिसके बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और एक अधिकारी को फर्जी ग्राहक बनाकर महिला के संपर्क में भेजा। डीसीपी के अनुसार, महिला ने एक नवजात शिशु के बदले 20 हजार रुपये की मांग की। पैसे मिलने के बाद उसने बच्चे को सौंप दिया, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया।
जांच में सामने आया कि गिरोह नवजात बच्चों को नए परिवारों को सौंपने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। इस मामले में दिल्ली के रोहिणी स्थित एक निजी अस्पताल के मालिक को भी गिरफ्तार किया गया है, जिस पर फर्जी कागजात तैयार कर बच्चों को अवैध रूप से नए परिवारों को सौंपने का आरोप है।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े एक घरेलू सहायिका (मेड) और एक फ्रीलांस लैब टेक्नीशियन को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक, जिन परिवारों ने इन नवजात बच्चों को अपने पास रखा था, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की गई है। ऐसे ही एक दंपति को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया है।
फिलहाल पुलिस फरार दो अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और पूरे अंतर-राज्यीय नेटवर्क की जांच जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
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