नरेन्द्र मोदी सरकार ने लोगों से कुकिंग गैस सिलिंडर पर दी जाने वाली सब्सिडी को स्वैच्छिक रूप से छोड़ने की गुजारिश की थी। हालांकि, 15 करोड़ कनेक्शंस वाले कस्टमर बेस में से केवल 0.006 फीसदी लोगों ने ही इस पर अमल किया है। सरकार ने तीन महीने पहले लोगों से अपने गैस सिलिंडर पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने को कहा था और अभी तक केवल 8,868 लोगों या यूनिट्स ने स्वैच्छिक रूप से सब्सिडी को छोड़ा है। हालांकि, देश में मिलेनियर्स की बढ़ती संख्या के बीच यह आंकड़ा बेहद कम है। कुकिंग गैस सिलिंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को छोड़ने वालों में शायद ही दिल्ली के लुटियंस या मुंबई के कफ परेड एरिया के रहने वाले बाशिंदे हों। सरकारी अधिकारियों और कंपनी एग्जेक्यूटिव्स का कहना है कि कुकिंग गैस के लिए मार्केट प्राइस पेमेंट का विकल्प चुनने वालों में बेगूसराय, कटक, गुंटूर, भावनगर, लद्दाख और दुर्ग जैसे शहरों के लोग हैं। सब्सिडी छोड़ने वालों की संख्या काफी निराशाजनक है, खासकर ऐसे देश में जहां आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, करोड़पतियों की संख्या 42,800 हो। टैक्स कंसल्टेंट्स का कहना है कि करोड़पतियों की असली संख्या इससे कम से कम 10 गुना ज्यादा होगी। इस डिवेलपमेंट की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, श्यह बात काफी चैंकाने वाली है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई के पॉश इलाकों में रहने वाले अमीरों ने अभी तक स्वैच्छिक रूप से सब्सिडी छोड़ने पर अमल नहीं किया है। सालाना 5,000 रुपये से कम की सब्सिडी इन अमीरों के लिए कुछ भी नहीं है।श्
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