बाजार नियामक सेबी ने भेदिया कारोबारियों और जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर) को सख्त संदेश देने के लिए बड़े बदलावों का एलान किया है। नए मानकों के तहत प्रोमोटर का परिवार भी भेदिया कारोबार (इनसाइडर ट्रेडिंग) के दायरे में आएगा। अब इसके आरोपी को ही बेगुनाही का सबूत देना होगा। इसके अलावा विलफुल डिफॉल्टर बाजार से पैसा नहीं जुटा पाएंगे। कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंजों से डिलिस्ट कराना भी आसान हो गया है। अब 25 फीसद निवेशकों की मंजूरी के बाद 76 दिनों के भीतर कंपनी अपनी सूचीबद्धता (लिस्टिंग) समाप्त करा सकेगी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की बुधवार को हुई बोर्ड बैठक में निवेशकों और कारोबार के हित में नियम बदलने के संबंध में उक्त सभी फैसले लिए गए। नए मानकों के तहत इनसाइडर की परिभाषा का दायरा बढ़ा दिया गया है। इसके तहत प्रमोटर से जुड़े व्यक्ति यानी कनेक्टेड पर्सन भी आ गए हैं। छह माह से जुड़े व्यक्ति भी इनसाइडर माने जाएंगे। सेबी ने ऐसा भेदिया कारोबार के नियमों को अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप बनाने के लिए भी किया है।
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