आम बजट का हिस्सा बनेगा रेल बजट!
(India)
मोदी सरकार रेल बजट को आम बजट का हिस्सा बनाएगी। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के भीतर दो हिस्से बनेंगे। इसके तहत नीति और योजना निर्माण के कार्य स्वतंत्र विशेषज्ञों को सौंपे जाएंगे, जबकि बोर्ड के अधिकारियों के पास केवल ऑपरेशन की जिम्मेदारी रह जाएगी। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार केंद्र ने रेलवे की तमाम जिद्दी समस्याओं के स्थायी समाधान का मूड बना लिया है। इसके लिए जो सबसे पहला उपाय सोचा गया है, वह है रेल बजट का आम बजट में विलय करने का है। इसका मकसद रेल मंत्रालय के राजनीतिक इस्तेमाल की गुंजाइश को हमेशा के लिए खत्म करना है। सरकार का मानना है कि पृथक रेल बजट का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। यह व्यवस्था 1924 में अंग्रेजों ने की थी। उन दिनों परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी 90 फीसद और यात्री परिवहन में 75 फीसद थी। आम बजट का अस्सी फीसद ब्योरा रेलवे से संबंधित होता था। अब हालात उलट गए हैं। फिलहाल यात्री परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी घटकर 20 और माल परिवहन में 40 फीसद रह गई है। इसी के साथ आम बजट में रेलवे की हिस्सेदारी भी घटकर महज आठ फीसद पर आ गई है। रेलवे से बड़ी हिस्सेदारी तो रक्षा मंत्रालय की है, मगर उसका बजट अलग नहीं है। ऐसे में रेल बजट अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। इसके बावजूद रेल बजट का आम बजट में विलय आसान नहीं है। इसके लिए कई मोर्चों पर मशक्कत करनी पड़ेगी। कानूनी और तकनीकी पेंच सुलझाने होंगे। इसमें समय लग सकता है। लिहाजा अगले बजट सत्र में यदि विलय संभव न हुआ तो उसे 2016-17 के सत्र से लागू किया जाएगा।

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।