आखिरकार आठ दिन बाद गुर्जर आरक्षण आंदोलन समाप्त हो गया। सरकार गुर्जरों को पांच प्रतिशत आरक्षण देगी। गुरूवार को सचिवालय में हुई पांचवे दौर की वार्ता सफल रही। जिसमें सरकार और गुर्जरों को अलग से अति पिछड़ा वर्ग में आरक्षण देने पर सहमति बनी। यानी सरकार गुर्जरों को अति पिछड़ा वर्ग में शामिल करने के लिए अलग से विधेयक लाएगी और उसे सविधान की नवीं अनुसूची में शामिल कराने की भी सरकार ने हामी भरी है। करीब पांच घंटे सचिवालय में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला और मंत्रिमंडीलय उपसमिति के बीच ये वार्ता चली। समझौते पर सरकार की ओर से केबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़, अरूण चर्तुवेदी और हेमसिंह भडाना से हस्ताक्षर किए है जबकि गुर्जरों की ओर से बैसला समेत 19 गुर्जरों नेताओं ने हस्ताक्षर किए।
DISCLAIMER:
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।