पश्चिम बंगाल में ममता की रैली में सभी डरे हुए विपक्षी एकजुट हुए थे और सब मोदी के ही खिलाफ बोले। ये अनर्गल आरोप लगाकर मोदी को बदनाम करना चाहते हैं। ममता पश्चिम बंगाल की मजबूत नेता हैं लेकिन, वह देश की नेता नहीं हैं।
रविवार को यहां वीवीआइपी गेस्ट हाउस में अठावले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, विपक्षी दलों के पास न कोई मुद्दा है और न ही नीति, ऐसे में कोई गठबंधन असर नहीं करेगा। दावा किया कि सपा-बसपा गठबंधन का उप्र में भाजपा पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि दोनों दल अपने बुनियादी मतदाताओं का वोट एक-दूसरे को ट्रांसफर नहीं करा पाएंगे।
आठवले ने कहा कि मैंने अपनी पार्टी के लिए तीन सीटें उप्र के लिए मांगी थी लेकिन, बात नहीं बनी। अगर हमें सीटें मिल जाती तो दलित वोटों में 50-50 फीसद का बंटवारा होता और इसका लाभ भाजपा को मिलता। इसके लिए अमित शाह से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर मायावती दलितों का हित चाहती हैं तो उन्हें भाजपा के साथ आना चाहिए। याद रखना चाहिए कि भाजपा ने ही उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनाया।
सवर्णों को दस फीसद आरक्षण का स्वागत
सामान्य वर्ग के गरीबों को दस फीसद आरक्षण दिये जाने का अठावले ने स्वागत किया और कहा कि गरीब सवर्णों में लगातार आक्रोश बढ़ रहा था। मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला किया है। अयोध्या में राम मंदिर के साथ-साथ बौद्ध मंदिर निर्माण को प्राथमिकता देते हुए आठवले ने कांग्रेस की चुटकी ली।
कहा, अगर कांग्रेस राम मंदिर को अपने एजेंडे में शामिल करती है तो भी विश्व हिंदू परिषद को कांग्रेस का समर्थन नहीं करना चाहिए। अयोध्या मामला अदालत में है तो इस फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बाबा साहब की 128 फीट ऊंची प्रतिमा लगाने की मांग की और कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में दामोदर वैली का नाम बदलकर बाबा साहब के नाम पर कर देना चाहिए।
Digital Desk: Firoz Khan
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