रिपोर्ट के अनुसार, उस समय सायरन की आवाजें गूंज रही थीं, सीमा के पार ड्रोन की गतिविधियां देखी गईं और हालात इतने तनावपूर्ण थे कि प्रशासन ने पूरे शहर में लाइट बंद करने के आदेश दिए थे।
यह ऑपरेशन आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था, जिसके जवाब में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले किए गए थे और जैसलमेर क्षेत्र एक प्रमुख संवेदनशील ज़ोन बन गया था।
स्थानीय दुकानदार संग्राम चौधरी ने बताया कि अचानक बाजार बंद करने और लाइटें बंद करने के निर्देश दिए गए थे। कुछ ही मिनटों में आसमान में हलचल शुरू हो गई थी, लेकिन भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई ने लोगों का भरोसा मजबूत किया।
वहीं, स्थानीय निवासी प्रकाश बिश्नोई ने कहा कि उस समय पूरे क्षेत्र में अनुशासन अद्भुत था और लोगों ने स्वेच्छा से सभी निर्देशों का पालन किया। उन्होंने कहा कि ब्लैकआउट के दौरान भी लोगों ने धैर्य बनाए रखा और सेना के साथ मजबूती से खड़े रहे।
एक साल बाद भी जैसलमेर के लोग उन तनावपूर्ण पलों को याद करते हैं, लेकिन साथ ही भारतीय सशस्त्र बलों पर उनका भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत है।
Author: JAN TV Editorial Team
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