अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल और मई में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने के कारण आम के पेड़ों में ‘फ्रूट सेटिंग’ प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसका असर खासतौर पर पारंपरिक किस्मों जैसे ‘लंगड़ा’, ‘दशहरी’ और ‘चौसा’ पर पड़ सकता है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि राज्य बागवानी विभाग और दिल्ली के पूसा संस्थान द्वारा विकसित नई किस्में किसानों के लिए उम्मीद बनकर सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार ‘अम्रपाली’ और ‘मल्लिका’ जैसी नई किस्में हर साल फल देती हैं और इनके पेड़ आकार में छोटे होते हैं, जिससे कम जगह में ज्यादा पौधे लगाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां पहले एक क्षेत्र में करीब 100 पारंपरिक आम के पेड़ लगाए जाते थे, वहीं अब उसी क्षेत्र में नई किस्मों के लगभग 400 पेड़ लगाए जा सकते हैं। इससे कुल उत्पादन में बढ़ोतरी होने की संभावना है और पारंपरिक किस्मों की कमी का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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