खमेरा जैसे बैगा आदिवासी गांवों में खेत तालाब, बावड़ी और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जो भीषण गर्मी के बावजूद पानी से भरे हुए हैं। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका में भी सुधार हो रहा है।
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार, पौधारोपण और जल संरक्षण के लिए मिट्टी के गमलों का उपयोग किया जा रहा है और हजारों पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश जीवित हैं। गांव में बने खेत तालाबों का उपयोग अब मछली पालन के लिए भी किया जा रहा है, जिससे लोगों को अतिरिक्त आय मिल रही है।
स्थानीय लाभार्थियों का कहना है कि तालाब निर्माण के बाद उन्हें मछली पालन से अच्छा मुनाफा हुआ है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
डिंडोरी कलेक्टर Anju Pawan Singh Bhadauria ने बताया कि जिले में लगभग 2.82 लाख जल संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं, जिनमें नई और पुरानी संरचनाओं का मरम्मत कार्य भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यह अभियान जनभागीदारी से एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।
वहीं सहायक अभियंता बी. एस. तिलगाम ने बताया कि लोग अब जल संरक्षण के महत्व को समझ रहे हैं और अपने घरों में सोख गड्ढे व रिचार्ज गड्ढे बनाकर पानी को संरक्षित कर रहे हैं।
यह अभियान 19 मार्च को शुरू किया गया था और 30 जून तक चलेगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और जल संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।
Author: JAN TV Editorial Team
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