विजयवाड़ा के Indira Gandhi Stadium से छोड़े गए इस बैलून का नाम ‘विस्टा’ रखा गया है। यह लगभग 25 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा।
सुपर-प्रेशर बैलून ऐसे उच्च-ऊंचाई वाले गुब्बारे होते हैं जिन्हें बाहरी वायुमंडलीय दबाव से अधिक आंतरिक दबाव बनाए रखने के लिए डिजाइन किया जाता है। इसकी मदद से ये लंबे समय तक भारी उपकरणों को हवा में ले जाने में सक्षम होते हैं।
कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ CVS Kiran ने बताया कि इस मिशन का उद्देश्य भारत में पहली बार सुपर-प्रेशर बैलून तकनीक की क्षमता को साबित करना है। इसमें बैलून के डिजाइन और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच भी शामिल है।
कंपनी के अनुसार, बुधवार को लॉन्च किया गया बैलून करीब 24 घंटे तक हवा में रहेगा। हालांकि, भविष्य में ऐसे बैलून विकसित करने का लक्ष्य है जो कई महीनों तक आसमान में टिके रह सकें।
एसपीबी तकनीक को उपग्रहों का कम लागत वाला विकल्प माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि ये बैलून दूरसंचार सेवाएं देने, बड़े औद्योगिक नेटवर्क की निगरानी करने, आपदा प्रबंधन में मदद करने और रणनीतिक निगरानी जैसे कई काम कर सकते हैं।
रेड बैलून एयरोस्पेस ने बताया कि सुपर-प्रेशर बैलून आमतौर पर पृथ्वी की सतह से 20 से 40 किलोमीटर की ऊंचाई वाले समताप मंडल में संचालित होते हैं।
कंपनी की योजना चालू वित्त वर्ष के दौरान ऐसे 12 से 16 बैलून लॉन्च करने की है, जिससे भारत की हाई-एल्टीट्यूड एयरोस्पेस तकनीक को नई पहचान मिल सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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