मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए लोगों से अपील की है कि जहां भी हैंडपंप हैं, वहां सोख्ता गड्ढों का निर्माण जरूर करें। उनका कहना है कि यह एक बेहद सरल और कम खर्चीला तरीका है, जिसमें केवल गड्ढा खोदकर उसमें गिट्टी और रेत भरी जाती है। इससे इस्तेमाल के बाद निकलने वाला पानी जमीन में समा जाता है और भविष्य में जल उपलब्धता बनाए रखने में मदद करता है।
सोख्ता गड्ढा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की सबसे प्रभावी तकनीकों में से एक माना जाता है। यह हैंडपंप या पानी निकलने वाले स्थान के पास बनाया जाता है, जहां ईंट, पत्थर और रेत की परतों के जरिए पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है। इससे पानी की बर्बादी रुकती है और भूजल स्तर बनाए रखने में सहायता मिलती है।
रांची के नगड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि सोख्ता गड्ढों से गांव में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गर्मियों में पानी की कमी का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। ग्रामीण महिलाएं भी इस पहल को उपयोगी बताते हुए इसकी नियमित देखभाल कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर गांव और हर घर के पास हैंडपंपों के निकट सोख्ता गड्ढे बनाए जाएं, तो गर्मियों में भी भूजल स्तर को काफी हद तक बनाए रखा जा सकता है। इससे भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी और जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप मिल सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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