शनिवार को आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में किसान, खरीदार और बागवानी प्रेमी शामिल हुए। प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय आम उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ना और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना था। उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि ऐसे आयोजनों से किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित होता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और दोनों पक्षों को लाभ मिलता है।
महोत्सव में मल्लिका, आम्रपाली, फजली और हिमसागर जैसी लोकप्रिय किस्मों के आम भी प्रदर्शित किए गए। हालांकि सबसे अधिक चर्चा ‘काईरा’ आम की रही, जिसे पहले स्थानीय लोग ‘बनाना मैंगो’ के नाम से जानते थे। हाल ही में इसका नाम बदलकर ‘काईरा’ रखा गया है। आदिवासी भाषा में केले को ‘काईरा’ कहा जाता है, इसलिए इसके आकार को देखते हुए यह नाम दिया गया।
आम किसान कमला महतो ने बताया कि काईरा आम बेहद मीठा होता है और इसकी गुठली अन्य आमों की तुलना में काफी पतली और छोटी होती है। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ इसका अनोखा आकार और आकर्षक रंग इसे खास बनाता है। यही वजह रही कि महोत्सव में आने वाले लोगों की उत्सुकता इस आम को लेकर सबसे ज्यादा दिखाई दी।
आम महोत्सव किसानों के लिए अपनी उपज को सीधे बाजार तक पहुंचाने का प्रभावी मंच साबित हो रहा है। इससे उन्हें बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है, वहीं उपभोक्ताओं को भी ताजे और गुणवत्तापूर्ण फलों का लाभ मिल रहा है। आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि स्थानीय कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे मेलों की अहम भूमिका है।
Author: JAN TV Editorial Team
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