दिल्ली अग्निशमन सेवा ने "हर घर सुरक्षित, भारत विकसित" पहल के तहत सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सभी नई इमारतों में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। साथ ही पुरानी इमारतों को भी अगले तीन वर्षों के भीतर इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों का दावा है कि ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम आग से होने वाली मौतों को 97 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।
इसके अलावा फायर सर्विस की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भर्ती, नए फायर स्टेशनों की स्थापना और आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में विभाग के पास करीब 2,500 कर्मचारी हैं, जबकि आवश्यकता 12,000 से अधिक कर्मियों की बताई जा रही है। लक्ष्य है कि हर वर्ष कम से कम आठ नए फायर स्टेशन शुरू किए जाएं, ताकि राजधानी में 120 फायर स्टेशनों की जरूरत को जल्द पूरा किया जा सके।
आपातकालीन प्रतिक्रिया को और तेज बनाने के लिए दिल्ली अग्निशमन सेवा डिजिटल सिस्टम और नई तकनीकों का भी उपयोग कर रही है। भीड़भाड़ वाले इलाकों और संकरी गलियों के लिए क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल्स (QRV) की संख्या बढ़ाई जा रही है। पिछले वर्ष 24 ऐसी गाड़ियां तैनात की गई थीं, जबकि इस महीने 26 नई गाड़ियां शामिल होने जा रही हैं। इसके अलावा 50 और वाहनों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता, आधुनिक तकनीक, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज आपातकालीन प्रतिक्रिया के माध्यम से दिल्ली को आग से सुरक्षित बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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