अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और कोट्टायम जिलों में कुल पांच स्थानों पर छापे मारे। इनमें निजी अस्पतालों के साथ-साथ आरोपियों के आवास भी शामिल हैं। जांच सुबह करीब छह बजे एक साथ शुरू की गई।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी अंगदाताओं, मरीजों और अस्पतालों के बीच दलाल की भूमिका निभाते थे और अवैध अंगदान की व्यवस्था कराने के बदले मोटी रकम वसूलते थे।
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ने अंगदान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इनमें निजी अस्पतालों के लेटरहेड, पुलिस अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC), विधायकों, सांसदों और पुलिस अधिकारियों के नाम पर कथित तौर पर जाली पत्र शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि कई प्रमुख चिकित्सकों के अनुशंसा पत्र भी फर्जी बनाए गए।
ईडी फिलहाल अंगदान से जुड़े बैंक लेनदेन, मेडिकल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। जिन अस्पतालों के मुख्य आरोपी नजीब के साथ कथित वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं, वहां भी छापेमारी की गई।
पुलिस जांच के अनुसार, यह गिरोह अगस्त 2023 से सक्रिय था और अंगदान की कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। सामान्य तौर पर अंगदान के लिए पुलिस, स्थानीय निकाय, चिकित्सकों, विधायकों और सांसदों से विभिन्न प्रमाणपत्र और अनुमतियां आवश्यक होती हैं।
मुख्य आरोपी नजीब, जो कासरगोड का रहने वाला है, को पिछले महीने उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। अब ईडी इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
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