प्रशासन ने यह कदम वर्ष 2025 में मचैल यात्रा मार्ग पर हुए विनाशकारी बादल फटने की घटना को ध्यान में रखते हुए उठाया है। उस हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी, जिसके बाद यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई।
इस वर्ष यात्रा में शामिल होने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। इन कार्डों की मदद से प्रशासन तीर्थयात्रियों की लोकेशन पर रियल-टाइम नजर रख सकेगा। किसी भी आपात स्थिति, खराब मौसम या मार्ग बंद होने की स्थिति में श्रद्धालुओं तक तुरंत पहुंचना और आवश्यक कार्रवाई करना आसान होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौसम अलर्ट सिस्टम और RFID तकनीक से भविष्य में किसी भी बड़ी त्रासदी को रोकने में काफी मदद मिलेगी। उनका मानना है कि हर यात्री की ट्रैकिंग होने से सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी होगी।
इस पहल का विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी स्वागत किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि प्रशासन ने इस बार यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि RFID कार्ड के जरिए हर श्रद्धालु की लोकेशन का पता चलता रहेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थान पर रोका या पहुंचाया जा सकेगा। इसके साथ ही मौसम की निगरानी के लिए आधुनिक उपकरण भी लगाए गए हैं, जो खराब मौसम की पहले से जानकारी देंगे।
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बलों के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन और आधुनिक तकनीक को भी तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इन व्यवस्थाओं के जरिए दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र में स्थित मचैल माता मंदिर तक श्रद्धालुओं की यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने का प्रयास किया गया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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