पहली नजर में यह पेड़ सामान्य आम के पेड़ जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसकी हर शाखा पर अलग-अलग किस्म के आम लगे हैं। दशहरी, चौसा, लंगड़ा सहित कई लोकप्रिय किस्में एक ही पेड़ की अलग-अलग शाखाओं पर फल रही हैं। यह सब संभव हुआ है ग्राफ्टिंग (कलम बांधने) की आधुनिक तकनीक के जरिए।
वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक दीपक पुरोहित के अनुसार, वर्ष 1910 में स्थापित इस बाग के 116 वर्ष पुराने पेड़ पर प्रयोग के तौर पर 50 से अधिक किस्मों की ग्राफ्टिंग की गई थी। इनमें से 42 किस्में सफलतापूर्वक फल देने लगी हैं। उनका कहना है कि सीमित जगह वाले लोग भी अपने घर या टेरेस गार्डन में एक ही पेड़ पर कई किस्मों के आम उगा सकते हैं। सही तकनीक अपनाकर एक पेड़ पर 20 या उससे अधिक किस्मों की ग्राफ्टिंग की जा सकती है।
बाग के माली हेमचंद बताते हैं कि ग्राफ्टिंग के दौरान दो पौधों के हिस्सों को जोड़कर विशेष टेप से पूरी तरह सील किया जाता है, ताकि हवा अंदर न जा सके। लगभग एक से डेढ़ महीने में ग्राफ्ट तैयार हो जाता है। इस दौरान पौधे को पर्याप्त नमी और नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। ग्राफ्ट सफल होने के बाद पौधे को दूसरी जगह लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके पास खेती या बागवानी के लिए सीमित जमीन उपलब्ध है। एक ही पेड़ पर कई किस्मों के फल उगाकर न केवल जगह की बचत की जा सकती है, बल्कि अलग-अलग स्वाद वाले फलों का आनंद भी लिया जा सकता है।
अब देहरादून का यह ऐतिहासिक बाग एक और बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। विभाग की योजना इस पेड़ पर 100 अलग-अलग किस्मों के आम विकसित करने की है, जिसमें कई दुर्लभ और विशेष स्वाद वाली किस्में भी शामिल होंगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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