प्रदेश सरकार के अनुसार, यह उपलब्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग, विभागीय समन्वय और मिशन मोड में किए गए प्रयासों का परिणाम है। उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने, सोलर संयंत्रों की स्थापना, बैंक ऋण, डिस्कॉम निरीक्षण और सब्सिडी प्रक्रिया को तेज करने के लिए लगातार काम किया गया।
उत्तर प्रदेश नेडा (UPNEDA) के निदेशक रविंदर सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक 2,283.8 मेगावाट (2.28 गीगावाट) घरेलू रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित हो चुकी है। इससे लाखों परिवार अपनी छतों पर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं। रूफटॉप सोलर के कारण पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम हुई है और उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भी उल्लेखनीय कमी आई है। अनुमान के अनुसार, प्रदेश के लाखों परिवारों को प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये मूल्य की निःशुल्क सौर बिजली का लाभ मिल रहा है। साथ ही अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादक भी बन रहे हैं।
योजना के विस्तार से प्रदेश में सोलर इकोनॉमी को भी नई गति मिली है। वर्तमान में 7,000 से अधिक कंपनियां और व्यावसायिक इकाइयां इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सर्वे, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स, सेल्स, मार्केटिंग और ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित हुए हैं।
रूफटॉप सोलर की बढ़ती मांग से सोलर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को भी मजबूती मिली है। प्रदेश में सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, केबल, इलेक्ट्रिकल उपकरण, मीटरिंग सिस्टम, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों का विस्तार हुआ है। इससे निवेश, एमएसएमई, स्थानीय उद्यमिता और ग्रीन जॉब्स को भी बढ़ावा मिला है।
घरेलू रूफटॉप सोलर मॉडल की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए अलग से भूमि की आवश्यकता नहीं होती। घरों और भवनों की छतों का उपयोग कर बिजली उत्पादन किया जाता है। सरकार के अनुसार, यदि इतनी ही क्षमता ग्राउंड-माउंटेड परियोजनाओं से विकसित की जाती तो 9,000 एकड़ से अधिक अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होती। इस मॉडल से इतनी भूमि की बचत हुई है, जिससे कृषि, आवास और औद्योगिक विकास के लिए जमीन सुरक्षित बनी हुई है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी योजना का बड़ा प्रभाव देखने को मिला है। 2,283.8 मेगावाट स्थापित क्षमता से हर वर्ष लगभग 3.8 अरब यूनिट (3.8 बिलियन kWh) स्वच्छ बिजली का उत्पादन संभव है। इससे जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन में कमी आएगी और प्रतिवर्ष लगभग 27 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन से बचाव होने का अनुमान है। यह कार्बन बचत एक वर्ष में 12 करोड़ से अधिक परिपक्व पेड़ों द्वारा अवशोषित किए जाने वाले कार्बन के बराबर मानी जा रही है। इस तरह पीएम सूर्य घर योजना उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
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