अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पाटले ने बताया कि प्रदर्शनकारी कई दिनों से धरने पर बैठे थे और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। मेडिकल जांच के बाद उन्हें शांतिपूर्वक अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ने और पुल निर्माण स्थल असुरक्षित होने के कारण लोगों को वहां से हटाना आवश्यक था। महिलाओं को भी बसों के जरिए सुरक्षित उनके घर भेजा गया।
अपर जिला मजिस्ट्रेट विनय द्विवेदी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की गई थी। शुरुआत में कुछ लोग जांच के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन उन्हें समझाकर शांतिपूर्वक मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया।
हालांकि, प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन के दावों का खंडन किया। उनका आरोप है कि उन्हें बलपूर्वक हटाया गया और कुछ लोगों के साथ मारपीट भी की गई। ग्रामीण पिछले 17 दिनों से धरने पर बैठे थे। विरोध जताने के लिए उन्होंने प्रतीकात्मक चिताएं बनाई थीं और कुछ प्रदर्शनकारी फांसी के फंदे का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक मकानों का पूरा मुआवजा, पुनर्वास के लिए भूमि और आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसी मांग को लेकर वे आंदोलन कर रहे थे।
केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट से निपटने के लिए केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाना है। हालांकि, परियोजना का प्रभावित परिवारों और पर्यावरण समूहों द्वारा पुनर्वास, मुआवजे तथा पन्ना टाइगर रिजर्व सहित वन एवं वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव को लेकर विरोध किया जा रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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