सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति, पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल और अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के चलते राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान प्रदेश में 66 अवैध खनन स्थलों की पहचान कर कार्रवाई भी की गई।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल राजस्व वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शी ई-नीलामी, आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाओं और प्रभावी निगरानी व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता हर स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाना और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
सरकार के अनुसार, अवैध खनन पर निगरानी के लिए गूगल अर्थ आधारित पीजीआरएस प्रयोगशाला स्थापित की गई, जिसके माध्यम से 66 स्थानों पर अवैध खनन का पता लगाकर कार्रवाई की गई। इससे 2.19 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होने का दावा किया गया है।
इसके अलावा, ई-नीलामी, यूपी माइन मित्र पोर्टल, इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (IMSS), जियो-फेंसिंग, आरएफआईडी टैग, एआई और आईओटी आधारित चेकगेट, जीपीएस आधारित वाहन निगरानी तथा ई-नोटिस प्रणाली जैसी तकनीकों के जरिए खनन और खनिज परिवहन को अधिक पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।
सरकार ने यह भी कहा कि एम-सैंड नीति-2024 लागू कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ वैकल्पिक निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया गया है, जिससे खनन क्षेत्र में तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को गति मिली है।
Author: JAN TV Editorial Team
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