इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण, देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई।
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों व वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। कुशल केयरगिवर्स तैयार करने, उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, समावेशी और टिकाऊ केयर इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है।
कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भागीदारी की। इन विभागों की योजनाओं और संसाधनों को साझा रणनीति से जोड़कर केयर सेक्टर को व्यवस्थित रूप देने पर मंथन किया गया।
कार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख स्तंभों पर चर्चा हुई। घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य को आर्थिक पहचान देना, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना, केयर वर्कफोर्स के लिए प्रशिक्षण एवं प्रमाणन की व्यवस्था करना और सेवाओं की वित्तीय स्थिरता के लिए पीपीपी मॉडल, बीमा योजनाओं तथा सीएसआर फंड की संभावनाएं तलाशना प्रमुख विषय रहे।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स तैयार होने से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी। साथ ही युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक और टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ेंगे।
कार्यशाला को उत्तर प्रदेश में ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित कर उन्हें सामाजिक जरूरत के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के प्रभावी क्षेत्र के रूप में विकसित करना है।
Author: JAN TV Editorial Team
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