दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में व्यासपीठ का पूजन करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान भले ही कितना आगे बढ़ गया हो, लेकिन स्थायी शांति के लिए विश्व मानवता भारत भूमि की ओर देखती है। उन्होंने कहा कि भारत में पावन कथाओं की परंपरा कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है। पवित्र कथाओं के वाचन और श्रवण की परंपरा हजारों वर्षों की विरासत को समझने का अवसर भी देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में आचरण और विचार के बीच साम्यता प्रभावकारी होती है। जब व्यक्ति मनसा, वाचा और कर्मणा एक दिशा में चलता है तो सफलता प्राप्त होती है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता न होने पर भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा इसी भ्रम को दूर करने में मार्गदर्शन देती है।
कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास जी महाराज का गोरक्षपीठ में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के वाचन और श्रवण की परंपरा 5000 वर्ष पुरानी है। श्रद्धालु इस कथा के माध्यम से ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन के उद्देश्य और रहस्यों को समझने के लिए यह कथा महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने शुकदेव जी और राजा परीक्षित का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति ने लंबे कालखंड में अनेक परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना किया, फिर भी यह कथा स्मृतियों में बनी रही।
मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद वृंदावन से पधारे कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक होगी और इसका विराम 29 सितंबर को होगा।
कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार तक श्रीमद्भागवत महापुराण की शोभायात्रा निकाली गई। शंख ध्वनि और वेदपाठी विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शोभायात्रा कथा स्थल पहुंची, जहां अखंड ज्योति स्थापित की गई। पोथी प्रतिष्ठा और कथा व्यास के विराजमान होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य यजमानों ने व्यासपीठ तथा कथा व्यास की पूजा की।
इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी सुग्रीव किलाधीश अयोध्या के विश्वेश प्रपन्नाचार्य, रामलला सदन अयोध्या के जगद्गुरु राघवाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य, महंत नारायण गिरी, अवधेश दास, रामलखन दास, राजू दास, रामानंद दास, बालक दास और जयबख्श दास सहित अनेक संत, यजमान और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।