दरअसल पूरा गांव के वकील मांझी ने पैक्स चुनाव के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की घोषणा की थी जो उसके साथ गांव वालों को भी महंगा पड़ गया। नामांकन की पूर्व संध्या 20 सितम्बर को विपक्षी उम्मीदवार और उसके
सहयोगियों द्वारा वकील मांझी के बड़े भाई अर्जुन मांझी की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी। हत्या कांड में छह लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया। इसके बाद अभियुक्तों ने मृतक अर्जुन मांझी के परिजनों और अन्य ग्रामीणों को नरसंहार करने की धमकी दी । जिससे भयभीत गांव वाले जान बचाने के लिये गांव से पलायन करने लगे। मृतक के भाई रामप्रवेश मांझी की भी सन दो हजार में अगवा कर हत्या कर दी गयी थी। जिसमें 14 वर्ष बाद भी पुलिस सुराग नहीं लगा पायी। महादलित परिवार की पलायन की खबर सुन गया के जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की नींद खुली और दोनों अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को समझाने और आश्वासन देने पर महादलित वापस गांव लौटने को तैयार हो गये। हालांकि गांव वाले किसी अनहोनी की आशंका से अभी भी भयभीत हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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