साई बाबा विवाद में हस्तक्षेप नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट
(DELHI, India) न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जनहित याचिका पर इस तरह के विषयों का फैसला नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि श्रृद्धालु यदि यह महसूस करते हैं कि विवादास्पद बयान से उनके पूजा का अधिकार प्रभावित हुआ है या साईबाबा के खिलाफ तिरस्कारपूर्ण बयान दिये गये हैं तो वे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और उनके अनुयायियों के खिलाफ दीवानी दावा या फिर आपराधिक मामला दायर कर सकते हैं।
न्यायाधीशों ने कहा कि न्यायालय आवाज दबाने वाला कोई आदेश नहीं दे सकता क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है और यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें न्यायपालिका दखल दे। न्यायालय ने जनहित याचिका दायर करने वाले श्रृद्धालुओं से कहा कि उनके खिलाफ उत्पन्न समस्या के समाधान के लिये उन्हें उचित मंच से संपर्क करना होगा। न्यायालय साईधाम धर्मार्थ ट्रस्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह ट्रस्ट महाराष्ट्र में साईबांबा के विभिन्न मंदिरों का प्रबंधन देखता है। यह संगठन चाहता था कि साईंबाबा के प्रति अपमानजनक बयान देने से लोगों को रोकने का केन्द्र को निर्देश दिया जाये।

Author: JAN TV Editorial Team

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