न्यायाधीशों ने कहा कि न्यायालय आवाज दबाने वाला कोई आदेश नहीं दे सकता क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है और यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें न्यायपालिका दखल दे। न्यायालय ने जनहित याचिका दायर करने वाले श्रृद्धालुओं से कहा कि उनके खिलाफ उत्पन्न समस्या के समाधान के लिये उन्हें उचित मंच से संपर्क करना होगा। न्यायालय साईधाम धर्मार्थ ट्रस्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह ट्रस्ट महाराष्ट्र में साईबांबा के विभिन्न मंदिरों का प्रबंधन देखता है। यह संगठन चाहता था कि साईंबाबा के प्रति अपमानजनक बयान देने से लोगों को रोकने का केन्द्र को निर्देश दिया जाये।
Author: JAN TV Editorial Team
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