चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान : सरकार
(India) संसद में शुक्रवार को पेश छमाही आर्थिक समीक्षा में यह अनुमान व्यक्त किया गया है। इसमें यह भी है कि निवेश में अभी तेजी आनी बाकी है लेकिन मुद्रास्फीति में नाटकीय गिरावट आई है। वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वृहद आर्थिक परिवेश में सुधार से वृद्धि में सुधार की उम्मीद बंधी है। रिपोर्ट में राजस्व वसूली कमजोर रहने के प्रति आगाह किया गया है। समीक्षा में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में सात-आठ प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल कर ली जाएगी। मुद्रास्फीति में नाटकीय गिरावट का उल्लेख करते हुये कहा गया है कि कच्चे तेल के दाम में गिरावट आने से इस वर्ष चालू खाते का घाटा जीडीपी के दो प्रतिशत के आसपास सीमित रखने में मदद मिलेगी। समीक्षा में अनुमान है कि रिजर्व बैंक मार्च 2015 तक ब्याज दरों में यथास्थिति बनाये रखेगा। अनुमान है कि रपये की विनिमय दर का परिदृश्य भी स्थिर होगा। उल्लेखनीय है कि उद्योग जगत धीमी पड़ती औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुये ब्याज दरों में कटौती की लगातार मांग करता आ रहा है। वहीं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था और जीएसटी जैसे बड़े सुधार शुरू होने के करीब है। मध्यावधि आर्थिक समीक्षा ने अनुमान जताया कि सोने के अधिक आयात की भरपाई कच्चे तेल की कीमत में नरमी से होने के कारण चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पादन के मुकाबले करीब दो प्रतिशत रहेगा।

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