केंद्रीय कैबिनेट ने जघन्य अपराधों रेप, हत्या और डकैती में किशोरों की बढ़ती लिप्तता को देखते हुए सरकार ने 16-18 वर्ष के किशोरों के साथ वयस्क अपराधियों जैसा व्यवहार करने का निर्णय किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को किशोर न्याय विधेयक, 2014 में संशोधन को अपनी मंजूरी दे दी जिसे शीघ्र ही संसद में रखा जाएगा। नरेंद्र मोदी सरकार ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 6 अप्रैल को दिए गए निर्देशों के बाद उठाया है। इसके मसौदे के अनुसार गंभीर अपराध जब भी 16-18 वर्ष के किशोरों द्वारा किया जाएगा तो पहले यह मामला किशोर न्याय बोर्ड के पास भेजा जाएगा। बोर्ड यह तय करेगा कि अपराध बच्चे की तरह किया गया है या फिर वयस्क की तरह। बोर्ड में मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विशेषज्ञ भी होंगे और ये तय करेंगे कि यदि अपराध बच्चे की तरह किया गया है तो किशोर के अधिकार संरक्षित रहें। इस मूल्यांकन के आधार पर ही किशोर के खिलाफ अभियोग चलेगा। महिला एवं विकास मंत्रालय ने कहा, इससे किशारों द्वारा नासमझी में किए और जानबूझकर किए अपराधों का सही पता चलेगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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