भारत में नहीं है रैंसमवेयर का खास असर
(DELHI, DELHI) सरकार ने मंगलवार को फिर कहा कि दुनिया के कई देशों को प्रभावित करने वाले साइबर हमले रैंसमवेयर का भारत में असर पांच छह छिटपुट घटनाओं तक सीमित है और इसके कारण देश के आईटी तंत्र में किसी बड़ी बाधा की रपट नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अरुण सुंदरराजन ने यहां एक कार्यक्रम के अवसर पर कहा कि बहु-एजेंसी टीम हालात पर लगातार निगरानी रखे हुए है।
सचिव ने कहा कि सरकार मार्च से ही पूरी तरह सतर्क थी। जहां तक नेटवर्कों का सवाल है तो हम जरूरी सुरक्षा पैचेज पहले ही इंस्टाल कर चुके थे। हमें रैंसमवेयर के किसी बड़े असर की कोई रपट नहीं है। भारत की साइबर सुरक्षा इकाई सीईआरटी-इन ने इससे पहले कहा कि उसे देश के किसी विशेष नेटवर्क पर साइबर हमले की कोई औपचारिक रपट नहीं मिली है।

इस बीच साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने वाली क्विकहील ने कहा कि उसने देश में 48000 से अधिक रैंसमवेयर हमला प्रयासों का पता लगाया है। इस तरह के सबसे अधिक मामले पश्चिम बंगाल में देखने को मिले हैं।

क्विकहील ने एक बयान में कहा है कि उसने 48000 से अधिक एमएस 17-010 शेडो ब्रोकर हिट्स पकड़े हैं जो कि भारत में वानाक्र्राई रैंसमवेयर के लिए जिम्मेदार है। उल्लेखनीय है कि वानाक्राई ने रूस व ब्रिटेन सहित 150 से अधिक देशों के कंप्यूटर नेटवर्क को प्रभावित किया है इसे अब तक का सबसे बड़ा साइबर हमला बताया जा रहा है।

रपटों के अनुसार इस मालवेयर ने दुनिया भर में दो लाख से अधिक सिस्टम को प्रभावित किया है। वानाक्राई कंप्यूटर को बुरी तरह से प्रभावित करता है और उस पर फाइलों तक पहुंचने के रास्ते को लॉक कर देता है। साइबर अपराधियों ने इसे खोलने (अनलॉक करने) के लिए 300 डॉलर बिटक्वाइन (क्रिप्टो करेंसी) की मांग की है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि मांग की रकम अदा करने पर पहुंच बहाल हो जाती है या नहीं होती है।

Author: JAN TV Editorial Team

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