(DELHI, DELHI)
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में अदालत ने छात्रा से दुराचार के आरोपी नाबालिग लड़के के माता-पिता को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों को षड्यंत्र रचने का दोषी पाया है। मामले में नाबालिग आरोपी का मामला अभी किशार न्यायालय में विचाराधीन है। जबकि एक अन्य आरोपी युवक को अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई है। जानिए क्या है कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला। पीड़िता लड़की के चाचा ने 9 अगस्त 2015 को पट्टी राजस्व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी ने बताया कि कोटद्वार तहसील क्षेत्र के एक गांव में कक्षा 11वीं की छात्रा के साथ उसी के साथ पढ़ रहे एक नाबालिग और गांव के एक युवक ने दुराचार किया। मामले का पता तब चला जब पीड़िता गर्भवती हो गई। मुख्य आरोपी, नाबालिग आरोपी के माता-पिता और आशा कार्यकर्ता पीड़िता को 26 जुलाई 2015 को कोटद्वार स्थित एक अस्पताल में इलाज के लिए लाए। यहां तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे इसी दिन शाम को नजीबाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां पीड़िता की डिलीवरी हुई। हालांकि बच्चा मरा पैदा हुआ। जब पीड़िता को भर्ती करवाया गया तो आरोपियों में से एक ने स्वयं को उसका पति बताया था। इस पर डाक्टरों ने पीड़िता को भर्ती कर उसका उपचार किया। पीड़िता का लालन-पालन कर रहे चाचा को जब सारी बात पता चली तो उन्होंने राजस्व क्षेत्र में नौ अगस्त 2015 को मुकदमा दर्ज करवाया। तब राजस्व पुलिस ने दुराचार और पोक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया। बाद में यह मामला रेगुलर पुलिस के पास आया। इस पर कोटद्वार पुलिस के एसआई मुकेश कुमार ने छानबीन की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश पौड़ी कंवर सेन की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के दोषी जय प्रकाश को 20 साल की सजा सुनाई। जबकि अदालत ने इस मामले में षड्यंत्र का दोषी पाते हुए नाबालिग आरोपी के पिता घनानंद, मां संगीता और कोटद्वार निवासी आशा कार्यकर्ता सुमित्रा को तीन-तीन साल की सजा के साथ तीन-तीन हजार का जुर्माना लगाया। जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को दी जाएगी। अदालत ने जिला शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से प्रदेश सरकार को भी निर्देश दिए हैं कि वह पीड़िता को एक लाख का विशेष मुआवजा दे। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में कुल 12 गवाह प्रस्तुत किए गए थे।
Author: JAN TV Editorial Team
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