इस स्तंभ का निर्माण किसने कराया है, यह स्पष्ट नहीं है। इसे फिरोजशाह तुगलक मेरठ के आसपास से दिल्ली लाया था। उसने इसे शिकार महल में स्थापित किया था। उसके द्वारा टोपरा से लाए गए दूसरे स्तंभ को कोटला फिरोजशाह स्मारक में स्थापित किया गया था। वह इस स्तंभ से अच्छी स्थिति में है। इतिहासकारों का कहना है कि ये स्तंभ मूल स्थल से दिल्ली तक नदी मार्ग से लाए गए थे। इसकी ऊंचाई 10 मीटर है। फर्रुखसियर (1713-1719) के शासन काल में इस स्तंभ पर विस्फोट किया गया, जिससे इसके पांच टुकड़े हो गए थे। अभिलेखों को भी आरी से मिटाने की कोशिश की गई। बाद में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल को टुकड़े भेजे गए। वर्ष 1866 में ये वापस लाए गए और 1867 में जोड़े गए।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।