गौरतलब है कि जम्मू के कठुआ में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले को लेकर देश भर में काफी बवाल मचा था। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में इसकी आलोचना की थी। कठुआ गैंगरेप के बाद उपजे व्यापक जनाक्रोश के मद्देनजर सरकार ने 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले दोषियों को मौत की सजा को मंजूरी दे दी थी।
जम्मू-कश्मीर सरकार को कोर्ट ने कहा है कि वह पीड़ित पक्ष को पठानकोट कोर्ट में सरकारी वकील उपलब्ध कराए। साथ ही पीड़ित परिवार उनके वकील और गवाहों को सुरक्षा दें। कोर्ट ने कहा कि मामला उसके पास है। कोई और अदालत इस संदर्भ में आदेश पारित नहीं करेगी। मामले में पीड़ित के परिजनों और उसके मामले की पैरवी कर रही वकील की सुरक्षा बरकरार रहेगी। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच पर भरोसा जताते हुए मामले की सीबीआई जांच से इंकार किया है।
पीठ ने इस मामले में उर्दू में दर्ज बयानों का अंग्रेजी में अनुवाद कराने का भी निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस मुकदमे की सुनवाई जम्मू कश्मीर में लागू रणबीर दंड संहिता के प्रावधानों के अनुरूप की जायेगी। न्यायालय ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई आरोपियों और पीड़ित परिवार के लिये पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।
Author: JAN TV Editorial Team
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