इनमें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने एससी-एसटी कानून को फिर से पुराने रूप में लागू करने और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के मुद्दे प्रमुख हैं। भाजपा नेतृत्व अपनी तैयारियों के बीच विपक्ष की महागठबंधन बनाने की तैयारियों पर भी नजर रखे हुए है। विपक्षी खेमा एकजुट होने पर पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समीकरणों के बूते एनडीए पर भारी पड़ सकता है। इसकी काट के लिए भी मोदी सरकार ने जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाले विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दे दी है और अगले सप्ताह वह राज्यसभा में आएगा। सरकार की कोशिश इसी सत्र में इसे पारित कराने की है ताकि वह देश भर में पिछड़ों को संदेश दे सके कि भाजपा उनकी सच्ची हितैषी है।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।