न्यायालय का यह आदेश आपदा प्रबंधन उप समिति की उस सलाह के एक दिन बाद आया है जिसमें उसने जलाशय के जलस्तर में फिलहाल दो से तीन फुट पानी कम रखने की बात कही थी। न्यायालय ने तमिलनाडु और केरल सरकार से एक-दूसरे को सहयोग करने तथा मुल्लापेरियार बांध से संबंधित समिति के दिशानिदेर्शों पर अमल करने का भी निर्देश दिया है।
खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले को केरल और तमिलनाडु के बीच का विवाद नहीं मान रहा बल्कि वह इसे आपदा प्रबंधन और जानमाल की रक्षा के नजरिये से देख रहा है। मामले की अगली सुनवाई अब छह सितम्बर को होगी।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।