तीन भारतीयों को लेकर जाने वाले क्रू मॉड्यूल के साथ एक सर्विस मॉड्यूल भी होगा। इन दोनों मॉड्यूल्स को मिलाकर ऑर्बिटल मॉडयूल बनेगा, जो अडवांस्ड जीएसएलवी एम-III रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे।
इस यात्रा पर एक सप्ताह तक तीन यात्री माइक्रोग्रैविटी और अन्य प्रयोग करेंगे। वापसी की यात्रा में ऑर्बिटल मॉड्यूल खुद को रीओरिएंट कर लेगा। क्रू और सर्विस मॉड्यूल 120 किलोमीटर की दूरी पर अलग-अलग हो जाएंगे।
क्रू मॉड्यूल एयरब्रेक का इस्तेमाल कर अपनी स्पीड कम करेगा और अरब सागर में उतरने से पहले पैराशूट खुल जाएंगे। के. सिवन ने कहा कि यदि कोई तकनीकी समस्या हो जाती है तो क्रू मॉड्यूल बंगाल की खाड़ी में उतरेगा।
यह मॉड्यूल 3.4 मीटर चौड़ा होगा और इसका वजन 7 टन के करीब होगा।
तैयारियों को लेकर सिवन ने कहा, 'पहली मानवरहित टेस्ट फ्लाइट इसरो 30 महीने के भीतर भेजेगा। इसके बाद दूसरी मानवरहित टेस्ट फ्लाइट को 36 महीने में भेजा जाएगा।' पहली ह्यूमन स्पेसफ्लाइट 40 महीने के भीतर भेजी जाएगी।
इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।