याचिककर्ता का कहना है कि सरकार ने तीन तलाक अध्यादेश लाने के लिए संविधान के अनुच्छेद का दुरुपयोग किया है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 19 सितम्बर को इस बाबत अध्यादेश जारी किया था, जिसे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी थी और गजट में प्रकाशित होने के साथ ही वह उसी दिन से अमल में आ गया। इस अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने तीन तलाक को गैर-कानूनी बनाया है और इसके तहत तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। तीन तलाक से संबंधित विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है लेकिन राज्यसभा में यह अटक गया था। इसके मद्देनजर सरकार यह अध्यादेश लायी है।
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