लापरवाही /इलाज के अभाव में हुई सफेद बाघ की मौत
(India) बिलासपुर. कानन पेंडारी स्मॉल जू में सफेद बाघ की मौत समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हुई थी। सांप के डसने के 15 घंटे तक भी कोई उसे देखने नहीं पहुंचा था। इसका बड़ा वन्यप्राणियों के आकस्मिक घटना या बीमार होने पर उनके इलाज के लिए न तो वाइल्ड लाइफ के एक्सपर्ट डॉक्टर हैं और न ही बायोलॉजिस्ट।
वन्यप्राणियों की देखरेख और सुरक्षा के मामले में कानन पेंडारी जू में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली के मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके चलते वन्यप्राणियों की जान खतरे में पड़ गई है। जू में संरक्षित श्रेणी बाघ, शेर सहित अन्य वन्यप्राणियों को शाम 5 बजे नाइट एनक्लोजर में रखने के बाद सुबह 8 बजे तक उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इस बीच उनकी देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं होती।

सफेद बाघ विजय के साथ भी यही हुआ। जू कीपर उसे शाम को नाइट एनक्लोजर में छोड़कर गए और उसके बाद सुबह जब जू कीपर वहां पहुंचा, तो उसकी मौत हो चुकी थी। कानन के अफसर सांप काटने की कहानी को पूरे जोर से प्रचारित कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बाघ को सांप ने काट लिया तो 15 घंटों के बीच उसकी देखरेख की कोई व्यवस्था क्याें नहीं थी।

संरक्षित श्रेणी के वन्यप्राणी की सुरक्षा में लापरवाही के आरोप से वह बच नहीं सकते। कानन के अधिकारी बाघ की असमय मौत के लिए जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग वाइल्ड लाइफ प्रेमी कर रहे हैं। वहीं जू प्रशासन पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ने में लगा हुआ है।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के अधिकारी 2016 में कानन पेंडारी के निरीक्षण में पहुंचे थे। इस दौरान यहां पाई गई कमी, खामियों को दूर करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया। इसमें जू में वित्तीय निर्णय लेने के लिए नियमित डायरेक्टर, वन्यप्राणियों की निरंतर देखरेख के लिए बायोलॉजिस्ट, वन्यप्राणियों के बारे में सैलानियों को ज्ञानवर्धक जानकारी देने के लिए शिक्षा अधिकारी और वाइल्ड लाइफ का डॉक्टर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए थे, जिसका पालन नहीं हुआ।

Author: JAN TV Editorial Team

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