जहां एक तरफ बेरोजगारी देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ रोजगार सृजन अर्थव्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले 5 वर्षो में बेरोजगारी दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है, सरकार के खुद के आंकड़ों के अनुसार यह 45 साल के उच्चतम स्तर 6.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जबकि सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार बेरोजगारी की दर 7.2 प्रतिशत है। फरवरी के अन्त तक, लगभग 3.1 करोड़ लोग नौकरी की तलाश में थे, आकं डे बता रहें कि कुल रोजगार में कमी आई है, श्रम भागीदारी दर में कमी आई है और बड़े पैमाने पर वर्तमान नौकरियां खत्म हो रही हैं। बढ़ती बेरोजगारी और मौजूदा नौकरियों के खत्म होने से, सभी वर्ग महिला, युवा, छोटेव्यापारी, व्यवसायी, किसान, दिहाड़ी मजदूर और खेतिहर मजदूर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
कांग्रेस ने 1991 में नयी औद्योगिक नीति के साथ उदारीकरण की शुरुआत की थी। आज वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस एक दूरदर्शी प्रगतिशील औद्योगिक नीति बनायेगी।
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