इससे पहले अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि कोर्ट में मामले की सुनवाई के इस स्तर पर उन्होंने गलती से राम चबूतरे को भगवान राम का जन्मस्थान मान लिया था और भारतीय पुरातत्व सवेर्क्षण (एएसआई) की खुदाई की रिपोर्ट को विसंगतियों और अवसन्नताओं से भरा हुआ बताने के कारण उन्हें कोर्ट के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
मामले की 31वें दिन की सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि वे राम चबूतरा को भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं, हालांकि उन्होंने 1885 में फैजाबाद कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती नहीं दी कि हिंदू भगवान के जन्मस्थान के तौर पर उस चबूतरे पर पूजा करते हैं।
Digital Desk: Firoz Khan
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