कर्नाटक की 224 विधानसभा वाली सीटों में 17 विधायकों को अयोग्य ठहराने के बाद सीटें 207 रह गई थीं। इस लिहाज से बहुमत के लिए 104 सीटों की जरूरत थी। इसके बाद भाजपा (105) ने एक निर्दलीय के समर्थन से सरकार बना ली थी। लेकिन, उपचुनाव होने के बाद विधानसभा में 222 सीटें हो जाएंगी। उस स्थिति में बहुमत का आंकड़ा 111 होगा। भाजपा को सत्ता में बने रहने के लिए कम से कम 6 सीटें चाहिए।
महाराष्ट्र में शिकस्त के बाद यह उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। वहीं, कांग्रेस के लिए खोई जमीन वापस पाने और जेडीएस के लिए किंगमेकर बनने का मौका है। कांग्रेस और जेडीएस ने विधासभा चुनाव अलग-अलग लड़ा था। इसके बाद गठबंधन सरकार में जेडीएस नेता कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। 5 दिसंबर को उपचुनाव की 15 सीटों पर 165 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे।
Digital Desk: Firoz Khan
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