अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त हो रही है। सभी उद्योगों और सेवाओं में श्रम की मांग कम हो रही है। नतीजतन वर्ष 2019 तक गैर-कृषि क्षेत्र में एक चैथाई नौकरियां घट जाएंगी। यानी इस क्षेत्र में मौजूदा 5.2 करोड़ के मुकाबले 3.8 करोड़ लोगों के पास ही रोजगार रह जाएंगे। इससे सात साल में 1.2 करोड़ लोगों को फिर से कृषि क्षेत्र की ओर लौटना होगा। यह बीते पांच साल के आंकड़ों से ठीक उलट है। तब कृषि क्षेत्र में 3.7 करोड़ रोजगार घटे थे। देश की प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रोजगार के क्षेत्र में खतरे की घंटी बजाने वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2013-14 से 2019-20 के दौरान घरेलू अर्थव्यवस्था छह फीसद की धीमी रफ्तार से बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2005 से 2012 की अवधि में देश की आर्थिक विकास दर 8.5 फीसद रही थी। अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार के साथ घटती श्रम सघनता (पूंजी या मशीनों के मुकाबले श्रमिकों का कम इस्तेमाल) कोढ़ में खाज का काम करेगी। रिपोर्ट में वित्तीय, रीयल एस्टेट और आइटी व आइटीईएस जैसी कारोबारी सेवाओं का बाकायदा उदाहरण दिया गया है, जहां श्रम की मांग काफी कम है। इन सेवाओं की बीते वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में हिस्सेदारी 19 फीसद रही, जबकि इनमें आबादी के केवल तीन फीसद लोगों को रोजगार मिला।
Author: JAN TV Editorial Team
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