जब बांध में हो गया छेद तो एक छोटे लड़के ने बाढ़ के पानी को ऐसे रोका
(India) लड़का समझदार था। वह समझता था कि बांध से पानी रिसने के कितने भयावह परिणाम हो सकते हैं। पानी के दबाव से छेद बढ़ता जाएगा और फिर हो सकता है कि बांध का बड़ा हिस्सा ही ढह जाए। फिर तो पूरा नगर पानी में डूब जाएगा, यह विचार कर उसने छेद वाली जगह पर ढेर सारी मिट्टी डाल दी। पानी का रिसाव कुछ देर रुका भी, किंतु वेग तीव्र होने पर मिट्टी हट गई और छेद बड़ा हो गया। अब लड़का परेशान हो गया, क्योंकि नगर दूर था। वहां जाकर सूचना देने पर देर हो जाती और बांध तब तक टूट सकता था। जब कुछ भी न सूझा तो वह स्वयं छेद वाले स्थान पर लेट गया। पूरी रात इसी तरह बीत गई। उधर लड़के के माता-पिता चिंता कर-करके परेशान हो गए। उन्हें लग रहा था कि लड़का नदी में डूब तो नहीं गया, किंतु रात में कुछ हो नहीं सकता था। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी रात को वे इस लड़के को कैसे और कहां खोजें। सुबह होते ही वे नदी के किनारे-किनारे उसे खोजने लगे। जब लड़के ने उन्हें देखा तो चिल्लाकर अपने पास बुलाया और पानी रोकने के लिए कुछ प्रबंध करने को कहा। तब लड़के के माता-पिता ने नगर में जाकर इस बात की सूचना दी तो शीघ्र ही प्रशासन ने बांध को दुरुस्त किया। उस लड़के के साहस पर सरकार ने उसे पुरस्कृत किया। यही लड़का आगे चलकर फ्रांस का राष्ट्रपति बना। उसका नाम था- नेपोलियन बोनापार्ट।

जनकल्याण के लिए पूर्ण समर्पण के साथ काम करने वाले ही सच्चे जननायक होते हैं। समाज को सही दिशा ऐसे ही व्यक्तित्वों से मिलती है।

Author: Shiv Kishor

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