फिजा में घुले राग भूप और हंसध्वनि के सुर
(India) जयपुर- उनका यह कार्यक्रम स्पिकमैके, पर्यटन विभाग और जेडीए की ओर से म्यूजिक इन दी पार्क शृंखला के तहत सेंट्रल पार्क में हुआ। उन्होंने कल्याण थाट के राग भूप और कर्नाटक संगीत पद्धति से उत्तर भारतीय संगीत में जगह बनाने वाले राग हंसध्वनि को अपनी प्रस्तुति का माध्यम बनाया। कार्यक्रमकी शुरुआत मिश्र ने राग भूप से की। यह राग भूपाली के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तथा चलन अधिकतर मध्य सप्तक के पूर्वांग मन्द्र सप्तक में किया जाता है। यह चंद्र प्रकाश के समान शांत स्निग्ध वातावरण पैदा करने वाला मधुर राग है।

Author: JAN TV Editorial Team

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