बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दिल्ली का चुनाव बेहद अहम माना जा रहा था। यही वजह थी कि अमित शाह पिछले एक साल से बिहार की राजनीति पर नजर गड़ाए हुए थे और वहां जातीय समीकरण बिठाने पर काम कर रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने दिल्ली में चुनाव जीतने के लिए अपने सभी धुरंधर नेताओं को भी उतार दिया था। बावजूद इसके दिल्ली की जनता ने उन्हें नकार दिया।छात्र जीवन से राजनीति कर रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ये पहली हार है। एक समाचार चैनल पर उन्होंने कहा था कि वे आज तक कोई भी चुनाव नहीं हारे। कॉलेज लाइफ से लेकर गुजरात विधानसभा चुनाव तक उन्होंने कई बार जीत हासिल की। उसके बाद लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद पार्टी को उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कराया। फिर भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में जीत का चौका लगाया। लेकिन उनका ये विजयी रथ दिल्ली में फेल हो गया।दिल्ली चुनाव के बाद सभी खबरिया चैनलों ने अपने-अपने एक्जिट पोल दिखाए। एक्जिट पोल में भी सबने आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की बात तो कही थी, लेकिन सीटों के अनुमान को लेकर सभी का आंकलन फेल हो गया। 70 सीटों पर चल रहे मतगणना में आप के उम्मीदवार 60 सीटों पर आगे चल रहे हैं, जबकि भाजपा सिर्फ 10 सीटों पर आगे है। सबसे खराब हालत तो कांग्रेस की है, जो अपने पुराने प्रदर्शन को भी दोहराती नहीं दिख रही है और सभी सीटों पर पीछे है।
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