अन्य पिछड़ा वर्ग की नंदिनी सोने की खदान के लिए मशहूर कर्नाटक के कोलार की रहने वाली है। उन्होंने चौथी बार में आईएएस बनने का लक्ष्य हासिल किया है। फिलहाल वह फरीदाबाद में कस्टम, एक्साइज एंड नारकोटिक्स एकेडमी में प्रोबेशन पर हैं। नंदिनी ने बताया, 2014 में आईआरएस मिलने के बाद 2015 में भी परीक्षा दी थी लेकिन सफल नहीं हो सकी। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। 2016 में एक बार फिर परीक्षा दी। नंदिनी ने कहा, टॉप करना अद्भुत अनुभव है। आईआरएस बनने के बाद इस सफलता के लिए मैंने जी-जान लगा दी थी। बता दें कि नंदिनी को 2014 में 849वीं रैंक हासिल हुई थी। नंदिनी ने वैकल्पिक विषय के तौर पर कन्नड़ साहित्य का पेपर दिया था। उन्होंने बेंगलुरु के एमएस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री हासिल की थी।सिविल सेवा परीक्षा में कुल 1099 उम्मीदवारों ने इस बार बाजी मारी है। इनमें सामान्य वर्ग से 500 उम्मीदवार, ओबीसी के 347, एससी कैटगरी के 163 और एसटी के 89 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है।
ये लिखित परीक्षा दिसंबर 2016 दिसम्बर में आयोजित की गई थी और इस साल मार्च से मई के बीच साक्षात्कार आयोजित किए गए थे। इन्हीं के आधार पर यह ये परिणाम घोषित किए गए हैं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) सहित अन्य शीर्ष सेवाओं के अधिकारियों के चयन के लिए यूपीएससी हर साल तीन चरणों - प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार - वाली सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करती है।देश भर के विभिन्न केंद्रों पर हर साल लाखों परीक्षार्थी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होते हैं।
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