फिल्म निर्माताओं की ओर से जारी बयान में कहा गया है, किसी राजनीतिक फिल्म के लिहाज से यह विरला मामला है। एफसीएटी का फैसला पूरी तरह हमारे पक्ष में है। दरअसल, सेंसर बोर्ड ने फिल्म को हरी झंडी देने से पहले निर्माताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और केजरीवाल से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लाने को कहा था। इसके बाद फिल्म निर्माता इस मामले को एफसीएटी में लेकर गए। सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष तब पहलाज निहलानी थे। केंद्र सरकार ने हाल में उनकी जगह प्रसून जोशी को सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। एफसीएटी ने अपने आदेश में कहा, ‘सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए अभिव्यक्ति की आजादी किसी अनुपयुक्त सम्मान की रक्षा से अधिक महत्वपूर्ण है। इस फिल्म में जो जानकारियां हैं, वे पहले से ही सार्वजनिक हैं। ऐसी स्थिति में एनओसी की मांग से सेंसर बोर्ड की वैधता पर सवाल उठेंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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