इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए तीसरे जस्टिस एम सत्यनारायण ने 12 दिनों तक दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद 31 अगस्त को अपना फैसला रिजर्व रख लिया था। वहीं, मद्रास हाईकोर्ट की तत्कालीन जस्टिस इंदिरा बनर्जी और एम सुंदर वाली दो जजों की बेंच ने 14 जून को बंटा हुआ फैसला दिया था।
बता दें कि पिछले साल सितंबर में 18 एआईएडीएमके विधायकों को राज्यपाल से मिलने के बाद एंटी डिफेक्शन कानून के तहत अयोग्य घोषित किया था।जिन 18 विधायकों को पिछले साल अयोग्य घोषित किया गया था, उनमें एस थंगातमिलसेल्वन भी शामिल हैं। इसके अलावा आर मुरुगन, एस मरियाप्पन केनेडी, के कदीरकामू, जयंती पदमनाभन, पी पलानीअप्पन, वी संथील बालाजी, एस मुथैया, पी वेट्रीवल, एनजी पथिबन, एम कोडनापानी, टीए इलुमलायी, एम रेंगास्वामी, आर थंगादुराई, आर बालासुब्रमनी, एसजी सुब्रमणयन, आर सुंदरराज, उमा महेश्वरी शामिल हैं।
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