अगर कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार किया तो वर्मा के पास विकल्प सीमित होंगे। जानकारों ने कहा कि अगर उनको ड्यूटी पर बहाल नहीं किया जाता तो उनका पद पर रहना मुश्किल होगा। सरकार तकनीकी रूप से उन्हें खुद नहीं हटा सकती। इसके लिए उनके खिलाफ शिकायतों को आधार बनाकर चयन पैनल के पास प्रस्ताव भेजना पड़ेगा। सीवीसी की जांच इसका आधार बन सकती है।
सरकार चाहेगी कि चयन समिति के पास वर्मा का मामला भेजने का विकल्प इस्तेमाल न करना पड़े और वर्मा को स्वंय निर्णय लेने दिया जाए। ऐसे में दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि वर्मा को समय से पहले रिटायरमेंट लेना पड़े। इस्तीफा देने का विकल्प भी उनके सामने होगा। वर्मा का कार्यकाल जनवरी के अंत में समाप्त हो रहा है। जानकारों के मुताबिक कोर्ट के रुख पर ही संभावित विकल्पों की तस्वीर साफ होगी।
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